MADHYA PRADESH SOIL PSC TOPIC 2020

 

 

 

Madhya Pradesh soil ( मध्यप्रदेश की मिट्टिया )

           

                                                   धरातल के ऊपरी परत(Upper layer of earth) जो पेड़ पौधों को अपने को बढ़ने के लिए जीवाश्म(Fossils) तथा खनिज(Mineral) प्रदान करती है मिट्टी(Soil) कहलाती है मिट्टी चट्टान(Rock) तथा जीवाश्मों (Fossils)  के मिश्रण से बनती है !

GK HINDI QUESTION ANSWER 2020

 

कृषि भूमि उपयोग फसलों का प्रादेशिक वितरण उत्पादन की मात्रा उत्तम एवं वनस्पति की भिन्नता वहां पाई जाने वाली मिट्टियों की प्रकृति से निर्धारित होती है किसी स्थान विशेष की प्रकृति कैसी है इसके लिए निम्नलिखित पक्षों का अध्ययन जरूरी होता है !

संरचना (The structure)  

सरंध्रता (Porosity)

रंग (Colour)

विभिन्न खनिजों की मात्रा

गठन

जल की मात्रा

 

 

Types of Soil of M.P.

 

 

काली मिट्टी(Black Soil)

 

यह मिट्टी गहरे रंग की दोमट मिट्टी है चीका एवं बालु के दो प्रधान अवयव हैं सफेद चीका युक्ति है मिट्टी बहुत भारी कांड वाली चुना मैग्नीशियम एवं कार्बोनेट के अंश वाली होती है !

 

 

इस मिट्टी में लोहे चुने एवं एल्यूमिनियम की अधिकता एवं फॉस्फेट नाइट्रोजन एवं जैव पदार्थों की कमी होती है काली मिट्टी का प्रदेश मुख्य है वहां बहुत मोटी तहों में मिलती हैं !

 

                                  इस काली चट्टान के झरने से ही यह मिट्टी बनी है इस मिट्टी के रासायनिक संगठन में अन्य रसायनों के अलावा लोहे और चूने की मात्रा अधिक होने से इंनका रंग काला हो जाता है पानी पड़ने पर यह मिट्टी चिपकती है एवं सूखने पर बड़ी-बड़ी दरारें पड़ जाती है जिससे इसमे वायु संचरण (Air circulation) तथा जल निकास (Drainage) की समस्या नहीं होती है !

 

                                मध्यप्रदेश में यह मिट्टी सतपुड़ा के कुछ भाग नर्मदा घाटी एवं मालवा के पठारी भागों में मिलती है  I   रतलाम, मंदसौर,  झाबुआ,धार, खंडवा, खरगोन,  देवास, इंदौर,सीहोर, उज्जैन, राजगढ़ , शाजापुर,  भोपाल, रायसेन, विदिशा,सागर,  जबलपुर ,नरसिंहपुर,दमोह, होशंगाबाद, बेतूल,छिंदवाड़ा, सिवनी, गुना,शिवपुरी,सिधी जिलों का भूभाग दक्कन के पठार का उत्तरी पश्चिमी भाग हैं !

 

                              मध्यप्रदेश में टीकमगढ़ छतरपुर रीवा सतना और पन्ना में मिश्रित काली और लाल मिट्टी मिलती है !

Madhya Pradesh soil 

लाल और पीली मिट्टी( Red  and Yellow Soil)

 

                             मध्य प्रदेश के बघेलखंडअर्थात  संपूर्ण पूर्वी भाग  में लाल और पीली मिट्टी पाई जाती है सामान्य रूप से लाल और पीली मिट्टी साथ-साथ पाई जाती है

 

                                 तथा लाल रंग लोहे के कणों के ऑक्सीकरण ( Oxidation)  के कारण होता है अधिकतर यह हल्की बलुई मिट्टी है किंतु कहीं-कहीं पर भारी चिकनी और दोमट मिट्टी भी प्रदेश में मिलते हैं

 

 

                                  इस मिट्टी में उर्वरता (Fertility) काफी कम होती है   I   इस मिट्टी में चूने की मात्रा पर्याप्त होने पर भी निक्षालन (Lexicon) के कारण उर्वरता बढ़ाने में यह सहायक नहीं होती है !

 

                              मध्य प्रदेश के अधिकांश ऊंचे पठार एवं तीव्र ढाल की पहाड़ियों के कारण कृषि की संभावना कम है फिर भी मैदान के अतिरिक्त विस्तृत क्षेत्र में काफी वनस्पति पाई जाती है तथा कृषि की भी जाती है

                               

                             बघेलखंड में मध्यवर्ती और पूर्वी भाग में रेतीली पतली परत के रूप में मिट्टी पाई जाती है इसमें चूने की मात्रा  कम है जिससे इस में धान की फसल अधिक बोई जाती है वही डलवा ( Slop) भागों में पीली वाली दोमट मिट्टी मिलती है

 Water falls in Madhya Pradesh 2020

                           फलस्वरुप यह प्रमुख कृषि प्रदेश है और यहां की प्रमुख फसल धान है !

 

Madhya Pradesh soil 

जलोढ़ मिट्टी(Alluvium)

                                 

                       मध्य प्रदेश के उत्तरी पश्चिमी भाग में मुख्यता मुरैना भिंड ग्वालियर तथा शिवपुरी जिले में यह मिट्टी पाई जाती है बुंदेलखंड न्यूज तथा चंबल द्वारा निक्षेपित पदार्थों से निर्मित यह मिट्टी गंगा घाटी के इस सीमांत प्रदेश में लगभग 30 लाख एकड़ भू भाग पर फैली हुई है !

 

 

                     इस मिट्टी में नाइट्रोजन जैव तत्व एवं फास्फोरस की कमी होने के कारण वनस्पति भी कम पाई जाती है इस मिट्टी की सतह बलुई दोमट व चिकनी दोमट तरह निकली कहो में अपेक्षाकृत महीन कणों का पदार्थ पाया जाता है भिंड तथा मुरैना जिले में मिट्टी का रंग पीला पन लिए हुए भूरा है

                       

                     मुरैना के अन्य भागों में गहरे रंग की मिट्टी पाई जाती है जलोढ़ मिट्टी में बालू सिलका तथा मृतिका का अनुपात पाया जाता है बालू के अधिकता के कारण इसमें अपरदन अपेक्षाकृत कम होता है !

 

कछारी मिट्टी(Alluvial soil)

                                    बाड़ के दौरान नदियों द्वारा अपने अपबाह (Runoff ) में बिछाई गई मिट्टी काली मिट्टी कहलाती है इस मिट्टी में गेहूं गन्ना कपास आदि फसलें बड़ी मात्रा में होती हैं

                                   

                                  मध्यप्रदेश में भिंड मुरैना ग्वालियर में चंबल और उसकी सहायक नदियों द्वारा यह मिट्टी लाई जाती है

 

                                कछारी मिट्टी का विस्तार भिंड जिले में की गोहद भिंड तथा मेहगांव मुरैना जिले की अखबार मुरैना जोरा सबलगढ़ व विजयगड़ तहसीलों के अधिकांश भाग पर तथा ग्वालियर श्योपुर एवं पोहरी तहसील के कुछ भाग हैं!

 

मिश्रित मिट्टी(Mixed soil)

                               

 

                               विंध्य प्रदेश एवं मध्य प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में लाल पीली एवं काली मिट्टी मिश्रित रूप में पाई जाती है यह मिट्टी फास्फेट नाइट्रोजन एवं कार्बनिक पदार्थों की कमी वाली कम उपजाऊ होती है 

 

                               इस प्रकार की मिट्टी में मुख्यता मोटे अनाज ज्वार मक्का आदि उत्पादित किए जाते हैं !

RIVERS OF MADHYA PRADESH THEIR ORIGIN AND MERGE

                                            मृदा अपरदन ( Soil Erosion )

                             

                              मध्य प्रदेश में मृदा अपरदन कृषि के लिए एक जटिल समस्या है क्योंकि इसके कारण मिट्टी की सतह से मिट्टी के विभिन्न भाग  कट कट कर बह जाते हैं जिसके कारण उस क्षेत्र की उर्वरता और उत्पादन में कमी आती है !

 

                             

                             मानसूनी वर्षा मृदा अपरदन का एक मुख्य कारण है यह वर्षा उस समय होती है जब ग्रीष्म ऋतु के बाद मिट्टी सुख कर भुर भुरी हो जाती है एवं जल के साथ साथ बह जाती है साथ ही यह वर्षा  का   तेजी से बहता हुआ जल भूमि का कटाव करता है !

 

                           

                           ग्रीष्म ऋतु  (Summer) में वनस्पति की कमी होने के कारण बहता हुआ वर्षा जल अधिक शक्ति से भूमि का कटाव करने में समर्थ होता है विभिन्न क्षेत्रों में ढाल की तीव्रता के साथ जल प्रवाह की गति भी बढ़ती जाती है जिससे उसकी – क्षमता भी कई गुना बढ़ जाती है !

 

 

                           चंबल की घाटी का भूमि क्षरण मध्य प्रदेश की  गंभीर समस्या है 

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